रात निकले हाय यादों के विच
लंबी दूरिया हं तेरे मेरे बीच
लौट कर आवाज मेरी मुझको सुनाई दे
है कोई दिवार जो दिलको ना दिखाई दे
साथ चलना था आखियोंको मीच
लंबी दूरिया हं तेरे मेरे बीच
चाँद निकला है फिर चाँदनी को लेकर
हम क्यु जुदा मगर इस जँहा मे होकर
कैसी है अजीब इस जहांन की रीत
लंबी दूरिया हं तेरे मेरे बीच
देख साथ साथ है कितनी जोड़िया ये
जैसे तोड़ आये सारी बेड़िया ये
अपनी ये प्रीत कब जाएगी जीत
लंबी दूरिया हं तेरे मेरे बीच
Sagar...✍️