Hindi Quote in Poem by Pushpa Sharma

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वाह रे! ऊपर वाले, ये कैसा है "न्याय" तेरा
किसी को महलों में बिठाया और किसीको रास्ते पर ला दिया
जिसे ठोकरें ही नसीब हुई अपनी कमाई से
भूखे पेट उन्हें, ऐसे सुला दिया
न थी हसरत कभी महलों की उन्हें
जिसे समझ मजबूर तूने, ऐसा सिला दिया

किस्मत तो बनाई तूने लेकिन
स्याह - सी काली, जैसे कोई डिब्बा हो खाली
आँखों में अश्रुओं से भरी हुई गागर
न खुशियां हैं, न कोई ख्वाहिश अब तो जीवन ही लगता है गाली
न पता है उजाले का मतलब, न अंधियारे का
जब जीवन की खिड़की से, झाँक रही हो रात अमावस की काली

कहते हैं, कि तू तो जगत पिता है
जिसने इस ब्रम्हांड को ही बनाया है
समन्दर, नदियां, पहाड़ और झरने
सभी में तू ही समाया है
बिन तेरे इशारे, न सूरज निकले न तारे
चहूं ओर तेरी ही माया है

अन्याय से कोसों दूर
न्याय की मुरत है तू
हम तुझसे ही हैं
हमारी हर जरूरत है तू

बस एक ही विनती है तुझसे
अब और अपनों को न सता
बहुत हो चुकी जलालत
अब भटके हुए राहगीरों को और न भटका

............ ✍️पुष्पा शर्मा

Hindi Poem by Pushpa Sharma : 111438634
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