लो आज फिर बिखर गया मैं,
भटकता हुआ अनजानी राहों से
पहूँचा था जो मैं तेरे पास,
चलो फिर तेरी राहों से जुदा हो गया मैं...
वाकिफ था रिश्तों के रगों से मैं
बदल जाओगे मैंने कहा था तुमसे,
'मैं वैसी नहीं जैसी दुनिया है'
तेरे इन्ही लफ्जों से तेरा हो गया मैं...
तेरे शहर की बदली हवा को क्या इल्जाम दूं
इन झोंकों में पहले भी खोया था मैं
तेरे संग जिन्दगी की बरसातों में भीगना था
अफ़सोस, तेरी यादों का सुखा हो कर रह गया मैं....
Manoj kumar(M-kay)