घना जंगल!
अगर कोई धर्म अपने नियमों- रीतियों के लिए बेहद कट्टर हो जाता है तो उसकी स्थिति उस घने जंगल की तरह ही हो जाती है जहां खूंखार जंगली पशु या आदिमानव की तरह रहता इंसान ही बसर कर सकता है। गैर सोच का कोई परिंदा भी वहां पर नहीं मार सकता।
न जाने कैसे मधुबाला, वहीदा रहमान, शर्मिला टैगोर, शाहरुख, आमिर, ऋतिक, सैफ़, सुनील, रितेश, मनोज, नसीरुद्दीन, संजय,अरशद...अपनी निजी जिंदगी के समायोजन में ख़र्च हुए होंगे!
ये पाप है क्या
ये पुण्य है क्या
रीतों पर धर्म की मोहरें हैं!
हर युग में बदलते धर्मों को
कैसे आदर्श बनाओगे???
(साभार- फिल्मी गीत)