Hindi Quote in Story by Abhinav Akash

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पिता का इंतज़ार

इंतज़ार

ध्रुवकांत की पत्नी का असमय देहांत हो गया । पत्नी से अगाध प्रेम करने वाले ध्रुवकांत ने कभी दूसरी शादी करने का सोच तक नहीं । नन्हें आलोक को माँ और बाप दोनों का प्यार देकर पाला-पोसा ।
ध्रुवकांत की छोटी सी प्राइवेट नौकरी थी, मगर बेटे के लिए सपने बड़े-बड़े सजाए थे। अपनी अथाह लगन से आलोक को खूब पढ़ाया-लिखाया। पढ़-लिखकर पढ़-लिखकर बेटे को बड़ी शहर के बड़े कंपनी में नौकरी मिल गई। जाते हुए आलोक बोला “ जल्दी ही मैं आपको अपने पास ले जाऊंगा। यह सुनकर ध्रुवकांत ने सुख की साँस ली और बाकी बची जिंदगी आराम से अपने बेटे के साथ काटने के सुखद सपने लेने लगा।
उधर बेटा नई नौकरी और बड़े शहर के सुख आनंद में ऐसा व्यस्त हुआ कि पिता को साथ ले जाने का वादा जैसे भूल ही गया। इधर ध्रुवकांत इंतज़ार में सूखता ही गया।
एक दिन आलोक के मित्र राहुल ने उसे अपने पिता की रिटायरमेंट की कुछ तस्वीरें दिखाई तो आलोक को याद आया कि उसके पिता तो पिछले महीने ही रिटायर हो गए होंगे । परेशान-सा हुआ सोचने लगा मुझे तो उन्हें लेने जाना था । इतनी बड़ी भूल कैसे हो गई मुझसे । पापा तो जाने क्या-क्या सोच बैठे होंगे ।अगले ही रविवार वो पिता को लेने घर रवाना हो गया।
पिता की खराब स्थिति को देखते हुए बोला “क्या हुआ पापा! इतने कमजोर कैसे हो गए, आपने अपना जरा भी ख्याल नही रखा। देखो तो कंधे कितने झुक गए हैं
और आपसे तो ठीक से चला भी नही जा रहा है”।
“एक बात बताओ आप तो रिटायर हो गए हो तो आप ऐसा कौन-सा काम करते रहे कि आपको अपने सेहत का भी ख्याल नही रहा” ।
बेटे की बात सुनकर ध्रुवकांत धीरे-धीरे कुर्सी से उठा और अपनी पतलून की दोनों खाली जेबों को बाहर निकाल कर उसे दिखाकर शिथिल आवाज़ में बोला, “तुम्हारा इंतज़ार बेटा!”

Hindi Story by Abhinav Akash : 111423381
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