नहीं जानती मै की तु कौन है,और क्या है,
नहीं जानती मैं,की तु कहां है,और कैसा है,
नहीं जानती मैं,की तेरा और मेरा रिश्ता क्या है,
नहीं जानती मैं की तु मेरा क्या लगता है,
नहीं जानती मैं की तु अच्छा है भी, या नहीं भी,
नहीं जानती मैं की तु सही हैभी,या नहीं भी,
नहीं जानती मैं की तु अपना है भी,या नहीं भी
नहीं जानती मैं तु मेरा है भी,या नहीं भी, फिर भी......
ये दिल तो तुम्हे ही बेशुमार और बेपनाह चाहता है,और
आज भी ये दिल तेरी ही आंस लगाएं बैठा है,और आज भी ये बेताब नज़रे और झुकी हुई पलकें आज भी तेरे इंतज़ार मै झुकी हुई है, और ये बेताब दिल बार बार मुझसे यही पुछता रहेता है,की ना जाने वो कौन सा पल होंगा,तब तुम आओगे,फिर इक दिन यूंही अचानक अंदर से आवाज़ आई,की वो आएगा,वो जरूर आएगा,और उसे आना ही होगा,और वो आकर ही रहेगा,तब झाके रूह को सुकुन मिला।
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केशर कुंज