बार बार ना चाहते हुए भी न जाने क्यु उनका ही ख्याल आता है.दीमाग जानता है, कि ये प्यार नहीं पर फिर भी न जाने क्यु दिल ये मान ने को तैयार ही नहीं,की ये सच है.
दिल बार बार उन्ही का ख्याल करता है ,और दिमाग उस ख्याल को ना आने पर मजबूर.
अजीब सी असमंजस है.दिल और दिमाग की इस लडाई में ना जाने कौन जीत ,और कौन हार रहा है.