कीमत किसी की पता चलती। है उसके अपने पास ना रहने पर इसके अनेको उदारण दिए जाते रहे है और आगे भी दिए जाते रहेंगे, हा एक बात अवश्य है कि जैसे जैसे जमाना आधुनिकता की ओर तीव्र गति से बढ़ रहा है पुरानी किवदंतियां का मोल भी उसी प्रकार से घट रहा है या उन किवदंतियों को इंसान मन ही मन स्वीकार तो करता है लेकिन प्रगट करने से हिचकता है , वो इसलिये की लोग कहेंगे जमाना कहां से कहा पहुँच गया और ये पुराने जमाने की दकियानूसी विचार धारा की चादर ओढ़े चल रहा है । आज भी हम भारतवासी पुरानी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को मानते है उस पर विस्वास भी करते है उनकी कीमत से परिचित है और अपनी आगे की पीढ़ी को उसे अपनाने की सिख भी देते है ।
**********कमलेश शर्मा"कमल" 25/4/20******
#किंमत