तुझसे संबंधित हर बात तुम्हारी याद दिलाती है।
तुम नहीं रहो तो तुम्हारी याद बहोत आती है।
पलभर की दुरीया भी फ़ासले में बदल जाते है।
वो घर, वो दिवारे, वो गलीकुचे मोहल्ले याद करते है।
तुम्हारी चहलपहल, तुम्हारी अदाये वफ़ाये
तुम्हारा लड़ना, तुम्हारा रुठना, मुस्कुराना
बहोत याद आता है, बहोत याद आता है।
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