जन्म लेते हैं रोज़
कितने ही विचार - इस मनःस्थली पर
कुछ विचार होते हैं क्षणिक
यूं ही पैदा होते हैं और
बुलबुलों की तरह गायब हो जाते हैं
कुछ विचार रोज़ ही सताते हैं
और नहीं छोड़ते पीछा हमारा
नहीं चाहता मन
पर फिर भी उग जाते हैं
कैक्टस की तरह
और बिना सींचे ही
बढ़ते जाते हैैं उनके कांटे
कुछ विचार बड़े मनोहर होते हैं
जो किसी चलचित्र की तरह
मन में बस जाते हैं और
जिन्हें जीने का मन होता है
जिन्हें अपने करों से सींच
ज़िंदा रखने का और सवारने
निहारते रहने का मन होता है
कुछ विचार नहीं मरते कभी
जो मनोभूमि से उतर
चलते हैं कर्मभूमि की ठोस धरातल पर
और आंदोलित करते हैं
कई और जन मन
और बनकर एक विचारधारा
बहते रहते हैं
समय की सीमाओं से परे
निरंतर निर्बाध ...
:- भुवन पांडे
#जन्म