#जन्म
हां, मैं फिर से जन्म लेकर
इस दुनिया में आना चाहती हूं।
स्वच्छंद हवा सी बहती हुई
शर्तों पर अपनी, मैं भी जीना चाहती हूं।
तोड़कर रूढ़ियों के बंधन व परंपराओं की बेड़ियां
मुक्त गगन में , मैं भी उड़ना चाहती हूं।
क्यों जियूं मैं दूसरों के नाम के सहारे
मैं अपना अस्तित्व स्वयं गढ़ना चाहती हूं।
चाहती हूं आऊं फिर से नारी ही रूप में
भेदभाव की दीवारों को मैं ढ़हाना चाहती हूं।
रह गई जो ख्वाहिशें , इस जन्म में अधूरी
फिर से जन्म लेकर, मैं उन्हें पूरा करना चाहती हूं।
सरोज ✍️✍️