कैसे कहते हो मैंने तुमको भुला रखा है।
आज भी तेरी यादों को सीने से लगा रखा है। खुली आंख से देखती हूं सपने ।बंद पलकों में तुम्हें छुपा रखा है।
बिखर न जाए यादों के मोती। बना माला सीने से लगा रखा है।
रोशनी में परछाइयां डराती थी हमें।
बंद कर दिल के दरवाजे अंधेरा कर रखा है।
तूने जो जलाया था अंधेरे में दिया
मैंने अपने सीने में आज जला रखा है।।