पूछना है मुजे मेरे कान से।
अधुरी रही क्यु में तुझसे ।।
आज भी जाना जाता है तु मुझसे ।
फिर क्या कमी रही मुझसे ।
प्रीत हो गई अमर ।
फिर क्यु नहि हुई मुकम्मल ।।
माना किस्मत का साथ नही था ।
हाथ तेरा मेरा हाथ नही था।।
हाथो की लकीरों मे वो निशान नही थे।
राधा के संग कान क्यु नही थे।।
माना तु प्रेम शीखाने आया था ।
मुज संग तु अधुरा रहेने आया था ।।
माना जाना जाता है प्रेम तुझसे ।
फिर भी नाम लिया जाता है तेरा पहले मुझसे ।।
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dp..