कविता ..
आँखों का पानी मरा ,मरी शर्म और हया ।
बहु कहे अब सास से ,धर में अब मेरा राज ।।
भाई भाई का ना रहा ,अब नहीं रहा विश्वास ।
बहन पराई हो गयी ,अब साली खासमखास ।।
मंदिर में पुजा करें ,धर में सदा करता क्लेश ।
माँ बाप बोझा लगे ,भेजे उनको वृद्धाश्रम ।।
दया ,ममता ना रही ,पत्थर दिल बना इंसान ।
रोटी के लिए लोग तरसते ,छप्पन भोग खाते भगवान ।।
फैला है अंधकार दिलों में ,पापाचार करते लोग ।
सच्चे भक्थ नही रहे ,दिखते ढोगी लोग ।।
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