इतनी फुर्सत कहाँ की तकदीर का लिखा देख सकू,
क्यूं की माँ बाप की मुस्कुराहट मे ही मेरी तकदीर बसी हे।
सारे तीर्थ यहीं, चारो धाम भी यहीं, जिसने माँ बाप की सेवा करी, जरुरत उसे पूजा पाठ की भी नही हे,
रखो भले ही घर मे पत्थर की मुर्ति का स्थान,
लेकिन दिल मे माँ बाप का स्थान नही, तो ये जिन्दगी शुन्य ही हे।
#शून्य