#आश्चर्य
वैज्ञानिकों द्वारा जब कोई नूतन अविष्कार होता है ।तो
सारे लोग आश्चर्य से उसे देखते हैं और उसकी चर्चा
होती है ।पहले पहल जब बल्ब का अविष्कार हुआ होगा तो उस जलते लट्टू के प्रकाश से तात्कालिक समाज के लोग चमत्कृत हुए होंगे ।
रेडियो के अविष्कार ने तहलका मचा दिया था । मैंने पढ़ा है कई लोग तो ये समझ कर दूर भाग रहे थे कि इसमें कोई प्रेतात्मा घुसी है । परंतु जब ये चलन में आया तो सामान्य
सी बात लगने लगी। टी वी , कम्प्यूटर , मोबाइल ये सब
आज की पीढ़ी को आश्चर्य चकित नहीं करते ।
परंतु इससे ज्यादा आश्चर्य चकित मुझको प्रकृति करती है।
हर रोज लाखों करोड़ों चमत्कार हो रहे हैं ।
एक ही मिट्टी एक ही खाद पानी जिसमें गुलाब भी होता है
चमेली भी होती है और अन्य फूल भी नित्य जन्म लेते हैं
सबका रंग खुशबू आकार जुदा जुदा हो या है ।एक ही खेत मट्टी में गेहूं भी होता है चावल भी उत्पन्न होता है ।
और अन्य सैकेडो किस्म के अनाज उगते हैं ।सबका स्वाद रंग रूप गुण अलग अलग ।
लाखों किस्म के जीव जंतु पशु नित्य जन्म भी ले रहे हैं और मृत्यु को भी प्राप्त हो रहे ।
करोड़ों वर्षों से सृष्टि का अनवृत क्रम निरंतर अवाध
गति से चल रहा है । आश्चर्य नहीं होता ।
हर रोज सूर्य उदय होता है ।हर रात अंधेरा होता है।
चांद घटता बढ़ता है । नदियां बह रहीं हैं निरंतर ,कितना कुछ प्रतिपल प्रतिक्षंण घट रहा है इस सृष्टि में ।
सोचिए तो आश्चर्य से सिहर उठेंगे आप ।