माचिस की डिबिया, शीशी के ढ़क्कन
झाड़ू की सींके, कोयले के टुकड़े
जिनको बचपन में खिलौने बनाकर खेले
इन सबका कोई मूल्य नहीं
अनमोल हैं वो यादे बचपन की
डंडे की तलवारे, रद्दी के रूपए
लूडो के पांसे, गुब्बारे की चूटपुटिया
क्या इनका मूल्य लगा सकते हो
गर्मी की छुट्टी, जाड़ों की मार
आमो की मिठास, जामुन के दाग़
नानी की कहनियां, नाना का प्यार
इनकी कीमत क्या दे सकते हो
यदि तुम देना चाहो मूल्य
हां, हां तुम दे सकते हो मूल्य
तो ढूढ़ो अपने आस पास तुम बचपन
देखो बचपन मर ना जाए
#मूल्य