इंतज़ार
आँखो में ख़्वाब ,
गालों पे गुलाल
होंठों पे थोड़ी सी मुस्कान ,
कर रहीं हूँ में इंतेज़ार ।
कुछ पल साथ गुज़ार लेते है ,
क्यूँकि इसके बाद ही तो है इंतेज़ार
फिर यादें करती रहेंगी अपना काम ।
तों चल जी जाते है आज इस पल को,
थाम लेते है इस वक़्त को ।
बनाकर कुछ यादें हज़ार ,
फिर करेंगे इस पल का इंतेज़ार ।
चल कुछ कर जातें है , आज हम जी जाते है ,
क्यूँकि कल क्या पता हमें करना पड़े इंतज़ार ।
ये इंतेज़ार भी है कमाल ।
Poetry by • Jill शाह •