*कुदरत का कहर भी जरूरी था साहब हर कोई खुद को खुदा समझ रहा था।*
*जो कहते थे,मरने तक की फुरसत नहीं है*
*वो आज मरने के डर से फुरसत में बेठे हैं।*
*माटी का संसार है खेल सके तो खेल।*
*बाजी रब के हाथ है पूरा साइंस फेल ।।*
*मशरूफ थे सारे अपनी जिंदगी की उलझनों में,*
*जरा सी जमीन क्या खिसकी सबको ईश्वर याद आ गया ।।*
*ऐसा भी आएगा वक्त पता नहीं था,*
*इंसान डरेगा इंसान से ही पता नहीं था।।*
🙏🏼