Hindi Quote in Motivational by निशांत त्रिपाठी

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शिक्षा एक ऐसा साधन हैं जहा व्यक्ति अज्ञानता का ऐनक उतारकर ज्ञान की आखो से इस दुनिया को समझने में सक्षम हो जाता हैं. एक अशिक्षित व्यक्ति केवल मर्यादित सीमा तक ही खुद को और इस समस्त सृष्टि को समज सकता हैं. लेकिन वही एक शिक्षित व्यक्ति खुद को और इस समस्त सृष्टि को समज़ने के लिए तत्पर रहता हैं. .शिक्षा के कारण ही एक इंसान को जीने की वजह मिलती हैं और उसके एक  वजह के कारण ही समस्त सृष्टि को ही नहीं बल्कि  समस्त मानव जीवन को इसका लाभ पहोचता हैं क्योकि शिक्षा इंसान के अंदर वैज्ञानिक सोच निर्माण करती हैं.

लेकिन दुर्भाग्यवश, बोहोत से लोगो ने शिक्षा को केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन मान लिया हैं  लेकिन इसके विपरीत महात्मा फुले मानते थे की शिक्षा याने नौकरी नहीं बाल्की एक व्यक्ति के समस्त कला और गुणों का विकास करना ही असल शिक्षा का मकसद हैं  .

मेरा मानना  हैं की,  ज्ञान के वजह से ही हमारे भीतर उचित भावनाओ का सृजन होता हैं,  और एक शिक्षित व्यक्ति इन भावनाओ को सवेंदनाओ में तब्दील करके विद्वान बन जाता हैं. लेकिन आज की शिक्षा व्यवस्था  में विद्यार्थी को जानकारी तो दी जा रही हैं लेकिन उनके भीतर भावनाओ और सवेंदना जागृत नहीं कर  पा रही हैं. उदहारण. शिक्षक जब नैसर्गिक पर्यावरण विषय पढाते हैं तब उस विद्यार्थी का मूल्यांकन उसके अंको के आधार पर किया जाता हैं,  अच्छे अंक केवल  एक विद्यार्थी की विषय पर अच्छी पकड़ हैं, ये दर्शाते हैं,  लेकिन क्या ये अंक यह दर्शाते हैं की विद्यार्थी पर्यावरण के बारे में कितना सवेदनशील हैं?. क्या उसने घर में जाकर पौधा लगाया हैं?  क्या ये जान लेना उचित नहीं हैं.

मेरे विचार से,  जब हमारी शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थी के भीतर  जानकारी के साथ-साथ, भावना और सवेंदनाओ के बीज बोने में सक्षम हो जाती हैं तो यही विद्यार्थी भविष्य में समाज को छाया देने वाले वृक्ष बन जाते हैं, और इस प्रकार से हम एक  ईमानदार,  ज्ञानी और  शांतिप्रिय समाज की  भी स्थापना कर सकते हैं.

Hindi Motivational by निशांत त्रिपाठी : 111392402
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