मेरी अधूरी कहानी
एक था राजा एक थी रानी
ज़िन्दगी भर सुनी यही कहानी
मैं किस कहानी का हिसा हूं
जिसे सब ने भुला दिया शायद मैं किस्सा हूं
मुझे याद है मेरा वो बचपन जब लक्ष्मण मुझको नाम मिला
मुझे याद है मा के वो कंगन जिसे देख मेरा दिल मचल गया
वो चूड़ी कुमकुम और बिंदिया
जिसे चुरा के मेने पहन लिया
मेरे पिता ने मुझे साजा भी डि
कहा तु लड़का है लड़कों को यह शौक नही
जिसे छीपा राहा अस्तित्व मेरा शायद मैं वो किस्सा हूं.।
मेने देखा ऐसा एक घर भी
जहाँ धूम धाम थी मची होई
थी आनी वली खोशखभरी
थे नाच राहे बूढ़ा, बूढ़ी
पर यकायक एक हवा चली
सब सब तबाह हुआ खुशी मीठ सी गई
था गुस्सा सब के चेहरे पर
मां सिसक सिसक के रो रही
फिर सुनाई दी उस माँ की सदा
यह मेरे दिल का है टुकड़ा
इससे दर्द में मैंने जनम दीया
जो किन्नर है तो क्या होआ
इसे यूं ना मुझसे जूदा करो
थोड़ा रहम करो थोड़ा रहम करो
फिर गुर्राया कोई तो था
कोई गैर नहीं वो था पिता
कहा ये गाली ह मेरी शान पे
ये कलंक के मेरे स्वाभीमान पे
ये मेरे समाज का हिस्सा नहीं
धिंडोरा पिटाओं ऐसा कोई किस्सा नहीं
इसे मिटाओंगा या छूपाऊंगा
तो हट्जा नहीं तो तुझे भी दफनउंगा
उसे छोड आया कहीं बाज़ार मे
शायद उसी के किसी समाज मे
यह देश हमारा आजाद हे
यहां एकता दिलो मे हजार है
सब एक हैं सब एक हैं पर हाथ किसीने थामाही नहीं
सब एक हैं सब एक हैं कोई आंसू पोछने आयाही नहीं
बस अब ना कोई राजा ना कोई रानी
बड़ी अधूरी हे मेरी कहानी