Hindi Quote in Poem by रामानुज दरिया

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#वसंत
संत की भंग होत तपस्या

जब बसंत के आगमन होत हैं

महक उठे गोरी के अंग –अंग

जब पवन मंद- मंद चलत हैं

साजन- सजनी रहें संग-संग

जब सुमन को भंवर तंग करत हैं

पांव में पायल बाजे छना-छन

जब नयनों से तीर दना-दन चलत हैं

आती है गोरी जब सामने मेरे

जिया मोरा धका-धक करत है

रसालों का योवन चूस लिए

तब भंवरे कैसे भना-भन करत हैं

बगिया में कोयल कूँ –कूँ करे

जब अमुआ सब बौरे लगत हैं

किसानन कय जियरा गद-गद होय

जब गेहुवन में गलुआ लगत हैं

मनवा मां सबके पीर उठत हैं

जब बसंत के आगमन होत हैं |

Hindi Poem by रामानुज दरिया : 111389216
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