इन बन्द दरवाजोमें
आजाद होने लगा हूं मैं
दिखती नहीं थी जो
वो चिड़िया वो गिलहरी, उनसे बातें करने लगा हूं मैं
समझता था नज़दीक जिनको
मेरे उस भ्रम को भी, अब जानने लगा हूं मैं
जो इस चार दीवारोंमें है
वहीं अपने है, ये ठीकठाक समझने लगा हूं मैं
ये आजादी ये चिड़िया ये भ्रम, "ये समय" के साथ फिर चला जाएगा
पर जो समझा हूं वो यहीं रहेंगा मेरे साथ, ये विश्वास करने लगा हूं मैं
सुकेतू कोठारी