Hindi Quote in Thought by Bhavik

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प्रेम -२

४) रूपांतरण क्यों??? प्रेम में रूपांतरण और प्रेम का रूपांतरण दोनों ही काफी अयोग्य है
पहले समझते हैं प्रेम में रूपांतरण :
प्रेम किसी शर्त के आधीन नहीं हो सकता तुम कहते हो कि पहले वह मेरी सोच के हिसाब से बदले फिर मैं उसे प्रेम करूंगा तो स्पष्ट रूप से तुम्हारी सोच में प्रेम से ज्यादा व्यापार छाया हुआ है ऐसा प्रेम कभी निस्वार्थ नहीं हो सकता। अब दूसरा यानी प्रेम का रूपांतरण वह भी अयोग्य है और यह बात तो चिंताजनक है क्योंकि यह हर दिन रिश्ते में से विश्वास को खत्म कर रहा है । कहीं सुना हुआ है कि प्रेम की शुरुआत दोस्ती से होती है पर मैं इस बात का स्पष्ट रूप से विरोध करता हूं, अगर तुम्हारे साथ ऐसा हुआ है तो तुम बडे ही चरित्रहीन इंसान हो। मैंने मिलके ऐसे लोगों से पूछा है तब उन्होंने कहा है कि पहले वह दोस्त थे और उनकी भावना बदल गई इसलिए आज जीवन साथी है , तभी मन से सवाल आता है कि कल अगर फिर से भावना बदल गई तो क्या करोगे?? यह भावना बदलने वाली बातों से ही एक लड़का और लड़की दोस्त बनने से डर रहे हैं।मुझे उस बात से भी घृणा है जब कोई लड़की किसी दोस्त को भाई बोलती है ।उसका अर्थ समझते हो??? इसका अर्थ साफ है कि उसे उसके चरित्र पर शंका थी और शंका से की गई दोस्ती से तो अच्छा है कि दूर रहा जाए संबंध से। मैं तुम्हें चुनने से मना नहीं कर रहा हूं , बात जीवनसाथी की है तुम्हें सिर्फ श्रेष्ठ नहीं श्रेष्ठतम चुनना होगा ।तुम उस इंसान की खोज कर रहे हो जो तुम्हारे साथ जीवन की उस परिस्थिति में भी होगा जब शायद तुम्हें खुद पर भी यकीन खो दो । इसलिए चुनाव जरूरी है लेकिन किसी संबंध के रूपांतरण से नहीं। अगर किसी के साथ तुम वक्त चाहते हो तो क्यों जरूरी है उस सबंध को एक नाम देना ?? बिना कुछ नाम दिये उसे जानो , फिर चुनाव करो। पहले दोस्त बनाना और फिर जीवन साथी स्पष्ट रुप से यह धोखा है ।मे पहले भी कह चुका हूं तुम्हे श्रेष्ठ नहीं श्रेष्ठतम चुनना है इसलिए किसी राह चलती खूबसूरती पर तुम उसे नहीं चुन सकते, तुम्हें भीतर की खूबसूरती भी देखनी पड़ेगी।

Hindi Thought by Bhavik : 111386682
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