*अब और बदनामी की ज़रूरत क्या है।*
पहले से ही है बदनाम,
बता अब और बदनामी की ज़रूरत क्या है।
अब हम बाते तो नहीं करते,
पर लोग सिर्फ हमारी बाते करते है,
बोल अब बातो की ज़रूरत क्या है।
जो नहीं की अबतक खता,
उनकी भी पा रहे है सजा,
बता उस खता को करने की अब ज़रूरत क्या है।
जीन अपनों को गैरो की बात का है भरोसा,
जिसने गैरो के लिए है अपनों को छोड़ा,
बता अब उनको अपना भी कहने की ज़रूरत क्या है।
जीन लोगो को हम ही पर नहीं है भरोसा,
जिसका असली चेहरा उस दानव ने दिखाया,
बता अब उनको भरोसा दिलाने की ज़रूरत क्या है।
सब कुछ तो अपनों की देन है,
जिनकी हर खता पर हम ही ने डाला था परदा,
बता अब उनको बेपर्दा करने की जरूरत क्या है।
जो खुद भूल चुके है अपना बीता कल,
जिनकी करतूतों का हो भी सकता है कोई आने वाला कल,
बता अब उनको सही क्या गलत क्या बताने की ज़रूरत क्या है।
पहले से ही है बदनाम,
बता अब और बदनामी की ज़रूरत क्या है।