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✎.....🍃मनुष्य
की दो अवस्थाएँ हैं।
*एक अवस्था है विचार की*
*और दूसरी अवस्था है निर्विचार की।*
विचार की अवस्था में आप हैं,
जहाँ मन में तूफ़ान चलते रहते है !
मन का आकाश सदा बादलों से भरा रहता है।
मन में विचारों की भीड़ लगी रहती है !
यह एक विक्षिप्त जैसी स्थिति है।
एक दूसरी अवस्था है.. *निर्विचार की।*
*जहाँ ह्रदय में एक गहरी शान्ति है।*
जब तक विचार हैं ,
तब तक आप संसार से जुड़े हुए हैं
जैसे ही आप निर्विचार हुए कि आप
परमात्मा से जुड़ गए।
आप खाली हुए कि द्वार खुला।
🙏😊💙
*_जय सियाराम जी_*
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