शुभ संध्या
वंदन
ब्रह्मदत्त
हम वह नहीं जो सस्ती बोली पर बिक जाएं,
हम वह हस्ती हैं जो अच्छे अच्छों की हस्ती
___पर भी भारी पड़ जाए, ब्रह्मदत्त
आदत तो मैंने अंधेरों में चमकने की डाली है,
सुबह की रोशनी में तो हर कोई चमकता है !!
चिंतन से ज्यादा मुझे मंथन पर विश्वास है-
ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़