उस अलौकिक सौंदर्य में हम इतने समर्पित हो गए।
भावना की बाढ़ में सर्वस्व अर्पित कर दिए।।
मै हूं उसमें या वो मुझमें कहां इसका भान था।
प्रेम के उस ज्वार में सब राज़ उसके हो गए।।
खंजर थमा के हांथ में उसके जो आया होश में।
कक्तल मेरा हो चुका था भावुकता के उस जोश में।
#भावुकता