उसने पूछा-तुम्हें याद नहीं आती?
मैंनें हँसते हुए कहा-याद,
आती है न
यहीं तो जीवन का आधार है
इसी के सहारे तो सब जीते हैं
एक युवावस्था में पहुंचा हुआ व्यक्ति
अपने बचपन के यादों से
एक वृद्धावस्था में पहुंचा हुआ व्यक्ति
अपने युवावस्था की यादों से
ये यादें हीं तो है
जिसे सुनाकर सुनाकर
वह सबको अपने जिन्दगि का मक़सद बताता है
और फिर एक नई यादें अपने जीवन में जोड़ता है
~सिद्घ साहित्य