अभी 3-4 दिन पहले एक वीडियो देखा तो उसमें एक पति को उसकी पत्नी ने बांध रखा था क्योंकि वो घर का काम नहीं करवा रहा था लॉकडॉउन में। बंधने के बाद वो खुलने के लिए चिल्ला रहा था , वहीं से मैंने ये हास्य को कविता लिखी है।
हे! प्रिय तुम्हारे चरणों में।
मैं नित नित शीश झुका ऊंगा।।
बन्धन को मेरे खोलो प्रिय।
सब काम तेरे करवाऊंगा।।
झाड़ू, पोछा बर्तन सारे।
कपड़े भी तेरे धूलवाऊंगा।।
जो भोजन तुमको हो प्रिय।
वो भोजन तुम्हें कराऊंगा।।
तुम आटा देना गूंथ प्रिय।
मैं पूड़ी सेंक खिलाऊंगा।।
डस्टिंग वस्टिंग कर दूंगा।
जाले भी सभी छुडाऊंगा।।
बन्धन को मेरे खोलो प्रिय।
मैं नित नित शीश झुका ऊंगा।।
©निमिषा