ख़ुश वहीं होते हैं
जिनके पेट भरे होते हैं
अच्छी बातें अच्छे जुमले वहीं बोलते हैं
जिनके पेट भरे होते हैं
बाप दादाओं की दी हुई संस्कृतियों का मज़ाक वहीं उड़ाते हैं
जिनके पेट भर होते हैं
देश के हर कोने में वहीं घूमते हैं
जिनके पेट भरे होते हैं
अच्छी रचना वहीं करते हैं
जिनके पेट भरे होते हैं
खाली पेट से शब्द नहीं आह निकलती है
क्योंकि खाली पेट तो मृत्यु से पहले की दशा है।
~सिद्ध साहित्य