# रानी
दिखलावे के रानी-राजा भूल -भुलैया में खो जाते ,
सच को रखते एक किनारे ,पाखंडों के जाल सजाते |
रानी बहता पानी बनकर उद्गम स्त्रोत सभी की बनती ,
और रहे दृढ़ संकल्पों पर जीवन की परिभाषा गढ़ती |
मन की रानी हो कोई तो मार्ग सभी को दिखलाती है ,
खुद सचेत रहती है जीवन सबका स्वर्ग बनाती है |