एक था राजा, एक थी रानी , ये कहानी हो गई थी बहुत पुरानी।
मगर समय का चक्र कुछ ऐसा चला, बहुतों की बदली कहानी।।
विश्वास नहीं होता सहसा मगर ये भी एक सच्चाई सभी ने जानी।
आधुनिक कष्टों से सहमी धरती, सुकून भरी अंगड़ाई की ठानी।।
पहले जो सुनते थे प्रकृति की बातें, आज उससे रूबरू होकर उस कहानी की सच्चाई जानी।
मानव की झूठी प्रगति से रूष्ट होकर ही प्रकृति ने अपनी भृकुटी है तानी।।
तो क्या इसके लिए हम कुछ नहीं कर सकते, प्रकृति ही बताएगी हमारे आैकातों की कहानी।
अभी तो एक कोरोना ने ही हमें पहुंचा दिया भूतकाल में ,बता के अपनी कहानी।।
चलो इसी बहाने शायद सुधर जाएं हम और लौट आए राजा रानी की कहानी।
वैसे आजकल राजा तो रहे नहीं, किन्तु घर घर नजर आ रहीं है रानी।।
भले ही ये कोरोना का असर है कि एक था राजा एक थी नहीं, है रानी।
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