प्रकाश
आओ चलें अंधकारसे उजालोंकी और,
ले चले भारतवर्षको नई उंचाइयोंकी और।
न थकेंगे,न रुकेंगे,न थमेंगे,
दुनियाको दिखायेंगे अपनी एकताकी ताकत।
यह युद्ध है पूरे भारतवर्षका ,
यहां न कोइ अकेला है,न हारा हुआ।
ए उठ भारतवासी,तु भारतमां की संतान है,
मां जननी तुझे बुला रही, चुकाना मां का उपकार है।
चले चल,बढे चल,
कितनी भी कठिनाइयां आये, रहें अविचल।
रखें दिलमें उत्साह,
यह भी दिन कट जायेंगे,न हो निरुत्साह।
क्युं है इतना विचलीत,
दिलमें रख आशाका किरण अस्खलित।
अब न कोई कृष्ण आएंगे,न आएंगे राम,
हमें ही राम बनकर इस वाईरसके रावण को मिटाना है।
आओ चलें अंधकारसे उजालोंकी और,
ले चलें भारतवर्षको नई उंचाइयोंकी और।