"हंसना मना है"
एक बार फज़लू शाम को जल्दी घर जाने लगा , फज़लू के दोस्त ने कहा , "फज़लू इतनी जल्दी घर क्यों जा रहें हों ।" फज़लू ने कहा "नहीं मुझे जल्दी घर जाना है नहीं तो मेरी पत्नी मुझे सुनाती है ।" फज़लू के दोस्त ने कहा ," तो क्या तुम अपनी पत्नी से डरते हो ,क्या तुम मर्द नहीं हो ,क्या तुम चूहे हों जो पत्नी से डरते हो ।" फज़लू ने कहा , " नहीं मैं मर्द हूं और इस बात का मेरे पास प्रुफ भी है ।" फज़लू के दोस्त ने कहा , "क्या प्रुफ है।"फज़लू ने कहा , मेरी पत्नी तो खुद चूहे से डरती है, इसलिए मैं चूहा तो नहीं हो सकता , और ऐसा कहा जाता है कि मर्द को केवल उसकी पत्नी ही डरा सकतीं हैं , इसलिए मैं मर्द हूं , और हां , मुझे दर्द भी नहीं होता ,चाहे जितना पिट जाऊं।"