#सवाल
शीर्षक - हिजाब
एक सवाल है मेरा तुम्हारे हिजाब से,
मुझे डर क्यों लगता है तुम्हारे मिजाज से।
गुजरती हो करीब से
जो बिना दुआ सलाम के,
लगता है ऐसा
जैसे कांटा सा चुभो दिया हो
किसी महकते गुलाब ने।
उफ्फ ये तुम्हारे
कदमों की धमक,
पाजेब की खनक
कसम से मेरा दिल धड़क जाता है
तुम्हारे इस दिलकश अंदाज से।
शीशी में भरी
दवा सी लगती हो,
हर जख्म पर
मरहम का काम करती हो
जब निगाह डालती हो तुम
अपने रुआब से।
एक सवाल है मेरा तुम्हारे हिजाब से,
मुझे डर क्यों लगता है तुम्हारे मिजाज से।