My Eventual Poem...!!!!
यारों प्रभुजी के दरबार में देर तो हैं पर
अंधेर नही,जो होगा बस अच्छा ही होगा
वक़्त बूरा आज हैं कल टल ही जाएगा
दीन तो बूरें होते हैं, जीदगीं हरगिज़ नहीं
अच्छे वक़्त में तो खुशहाल सभी रहते हैं
इन लम्हातको भी शुक्रगूजारीसे जीओ
इस बूरे वक़्त का दौर भी गूजर जाएगा
यक़ीन हैं, जो होगा बस अच्छा ही होगा
फ़ानी जीदगीं फ़ना तो होने के लिए ही
मिलीं हैं तो ग़म फ़ना होने का कयू करे
दिल कहें जो होगा बस अच्छा ही होगा
रब जानत है हमारे हर दर्द-ओ-मर्ज़ को
यक़ीन की बुनियाद हैं इम्तिहानकी घड़ी
प्रभु कहत जो होगा बस अच्छा ही होगा
वाईरस तो बहाना है इन्सान को इन्सान
से मिलाना हैं प्रभु का यहीं तो फ़लसफ़ा
हैं दिल से जो होगा बस अच्छा ही होगा
देखो मुड़ के प्रभु ने कितने एसे पन्नों ही
से वक़्त के तक़ाज़ों से इतिहास रचे थे
याद रखो जो होगा बस अच्छा ही होगा
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