मेरी निजी ज़िंदगी में दखल दिया उसने,
और पता नहीं कब ये दखल, मेरी ज़िन्दगी
का हिस्सा बन गया।
वो आया भी गया भी
पर ये दखल कहीं नहीं गया।
निजी बन गया,मेरी ज़िन्दगी की
अनचाही विधि बन गया।
ऐसी विधि जो मुझसे निभाते नहीं बनती
तकलीफ इतनी है कि बताते नहीं बनती।
क्या वो सिर्फ मेरी निजी ज़िंदगी ही रहेगा या
वो अपनी निजी भी कभी मुझसे आके कहेगा?
क्या कभी भी हम दोनों की
निजी ज़िंदगी नहीं हो सकेगी ।
क्या ये विधी हमेशा
अधूरी ही रहेगी !
#निजी