निजी जीवन में कामयाबी या नाकामी का बही-खाता रखनेवाले लाभ-हानि के हिसाब में खो जाते हैं। स्वयं का विश्लेषण करने के लिये सजगता ही काम आती है। कामयाबी अहं न लाये और नाकामी निरुत्साहित न करें, यही सजगता है। यह सजगता ही आत्मा की निजी संपदा है और इसका हिसाब परमात्मा के पास होता है।
.... भूपेन्द्र कुमार दवे