अहसाह ये हमारा अब निजी हो गया।
अहसास प्रेम का कुछ यू बुलंद हो गया,
लगे जैसे सांसो का चलना बंध हो गया,
अहसाह ये हमारा अब निजी हो गया।
न जाने कैसे ओर कब हो गया,
इश्क़ ये हमे बेवक़्त हो गया,
अहसाह ये हमारा अब निजी हो गया।
तड़पते इस दिल को यू चैन मिल गया,
जैसे तरसती यह धरा को रैन मिल गया,
अहसाह ये हमारा अब निजी हो गया।
ज़िन्दगी मे हर पल खुशनुमा बन गया,
इश्क़ होना हमारे लिए सादिया बन गया,
अहसाह ये हमारा अब निजी हो गया।
रुह को यू सुकून का पल मिल गया,
मानो जैसे खुद खुदा को घर मिल गया,
अहसाह ये हमारा अब निजी हो गया।
- Dilwali Kudi
#ખાનગી