#निजी
निजी जीवन तुम जियो, हम जिये तो पाप।
ये कहा का प्रेम है ? उत्तर दीजिए आप।।
निज अपने सपने जिये, प्रेम जिये निज संग।
समय हुआ प्रतिकूल तो, लगे छुड़ावन अंग।।
निज जननी के प्रेम को, क्या जाने संसार।
हर्षित हो पितु आत्मा, मातृ बने हरिद्वार।।
हाय हाय कर जग मुआ, हाय न देखत तोहि।
निजि आवत जब अंत तब, राम न आवत मोहि।।
।। ज्योति प्रकाश राय ।।