एक कली को बड़ा गुरूर था
वह मगरूर थी बहुत हुस्न पर
एक फकीर को जब हुआ
इस बात का इल्म उसने है कहां
तेरा भाग्य है क्या तुझे यह पता
कभी तुझे मैंने मकबरे में पाया
तो कभी गमगीन कब्र पर
अब बता तुझे किस बात पर गुरुर
सुनते ही मनचली कली निष्क्रिय हो गई
#निष्क्रिय