माँ के आंचल की छांव हो, पितृ सम अनुशासन की नाव हो
भ्राता ,भगिनी सम सहायता की डोर हो, तो क्यों न सफलता की भोर हो।
सखा , मित्र सम स्वस्थ प्रतिस्पर्धी हो , यदि ईश्वर की कृपा और उसकी मर्जी हो।
परहित, पर पीड़ा यदि अपना दर्द है , यही तो स्वस्थ जीवन का पासवर्ड है।
#पासवर्ड