वो क़भी गहरायो में थी तो क़भी मेरी यादों में
ये जीवन हे क़भी आती तों क़भी बुलाती हे
वक्त शीशा हे क़भी पूरा हे तो क़भी आधा हे
और में रुका हूँ वहाँ पे जहां कोइ नहीं आता हे
मेरा सबर खो जाता हे बस तेरी बाहों में रह जाता हे
यें माया की नगरी बुलाएगी
मगर जाने का नय
जेनिश