जब ठोकर लगेगी
तभी पीड़ा होगी,
जब जीवन समाप्त होगा
तभी शून्य सी मृत्यु का आभास होगा।
जब दृष्टि छूटेगी
अंधापन आयेगा,
जब कान फूटेंगे
बहरापन छायेगा।
हर क्रिया के बाद दूसरी क्रिया बनेगी,
आस्थाएं योंही खड़ी होंगी।
मनुष्य के पास जो भी है
उस पर जब ठोकर लगेगी,
तभी पीड़ा होगी।
* महेश रौतेला