कविता ..
विषय .कामिनी ...
चाँद सी परी ,विहार को चली ।
आँखों की तारा ,अपने जलवे दिखाती चली ।।
स्वर्ग की अप्सरा सी ,बन सबको भाती चली ।
रुप की रानी ,कामिनी सी लजाती चली ।।
अपने अनोखी अदाओं से ,दिल चुराती चली ।
अपने रुप की चाँदनी में ,सबको नहलाती चली ।।
नव यौवना सी बन ,प्रियतम को मिलने चली ।
कमसीन सी रुप के ,दीदार देती हुई चली ।।
फूलों की रानी ,अपने तन की खुशबु बिखेरती चली ।
अपने अद्भुत रुप के ,चर्चे कराती हुई चली ।।
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