आदमी की नज़र में पूर्णता मौजूद है
सिर्फ कशिश ही इसका वज़ूद है
इसे पाने के लिए हम कोशिश में हैं
यही दर्द है और दवा भी यही है
इसकी तलाश में हम भूल जाते हैं
कि हम आदमी हैं फ़रिश्ता नहीं हैं
पूर्णता को आदर्श मान कर
प्रयास करते रहना अच्छा है
हम उड़ नहीं सकते तो क्या हुआ
हवाई जहाज तो उड़ा ही सकते हैं
परिपूर्णता के निकट जा तो सकते
निराश न होना उसे छू नहीं सकते
#परिपूर्ण