यूँही दूरियों में गुजर गयीं ज़िन्दगी,
कभी वो जुदा..
कभी मैं जुदा..
इन चाहतों के मोड़ पर ,
कभी वो रुकी..
कभी मैं रुका..
वही रास्तें, वही मंजिले ,
ना उसे खबर..
ना मुझे पता..
अपनी अपनी अहम की आग में ,
कभी वो जली..
कभी मैं जला..
ये कुदरत का अजीब सा खेल था ,
ना वो बेवफा..
ना मैं बेवफा..
फिर ये कैसा इंसाफ है।
ना मुझे वो मिली..
ना मैं उसे मिला..
🥀 #दर्द