{ बशीर बद्र की किताबसे }
( Most Appropriate for Today's situation of #CORONA )
#MR
यूँ ही बे-सबब न फिरा करो
कोई शाम घर में भी रहा करो
वो ग़ज़ल की सच्ची किताब है
उसे चुपके-चुपके पढ़ा करो
कोई हाथ भी न मिलाएगा
जो गले मिलोगे तपाक से
ये नये मिज़ाज का शहर है
ज़रा फ़ासले से मिला करो |