कोरोना कोरोना ,सबको है जीना
कैसी तेरी हरकत मौत से डरो ना।
अपनों से अपनों को तू दूर करो ना।
बजे बेरहम हो बड़े बेशर्म हो,
छोटे से छोटे बुज़ुर्गों के नाक में दम हो।
मानव के शत्रु ज़रा मेरी भी सुनो ना,
हमने ना हारा है ना सीखा है रोना,
लगा ली है कर्फ़्यू अपने ही घरों में,
घरों में रहके कोरोना तुम से बचके,
निकलेगा भारत संकल्प है अटूट ना।
मुक्तेश्वर मुकेश
४.५५ अप०
२२/०३/२०२०.